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कालचिंतन

जिस समयकाल के हम साक्षी हैं वह कल इतिहास हो जाएगा। इस समय काल को इतिहास बनने से पहले इसका सच जानने के मकसद से चिंतन का वीणा उठाया है। यह मेरी प्रवृत्ति भी है क्यों कि मैं पेशे से पत्रकार और शिक्षा-दीक्षा के लिहाज से इतिहासकार भी हूं। इतिहास व वर्तमान दोनों का संगम है यह कालचिंतन । वर्तमान को भी इतिहास के आइने से देखने का माध्यम होगा कालचिंतन। इसकी कुछ खरी-खोटी अनुचित लगे तो बेशक प्रहार कीजिएगा मगर सार्थक अंदाज में ही । तो आइए जानें अपने वतन को कालचिंतन की नजर से।

पोर्टल निर्माता Dr. Mandhata singh
अंतिम बार संशोधित 29 मई, 2009 11:55:07 PM IST