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टिकट दलालों ! तेरी अब खैर नहीं

रेलवे ने सूचना प्रणाली को पारदर्शी बनाने के साथ ऐसे बहुत से उपाय अपनाए हैं जिससे आम आदमी को कम परेशानी हो और उसके ठगे जाने की गुंजाइश भी कम हो। पहले पूरे देश में एकीकृत सूचना प्रणाली लागू की गई। आप १३९ पर फोन करके किसी भी भाषा में ट्रेन संबंधित सूचना हासिल की जा सकती है। लाइन में लगकर समय बर्बाद करने की जरूरत नहीं। इसके अलावा इटरनेट टिकट बुकिंग वगैरह तमाम सविधाएं मुहैया कराई गईं हैं। अब दलालों से मुक्ति दिलाने की मुहिम भी छेड़ दी गई है।
रेल टिकट दलालों से परेशान रेलवे ने दलालों के टिकट पकड़ने का नया तरीका निकाला है। आरक्षण फार्म पर भरे जाने वाले टेलीफोन व मोबाइल नम्बर रेलवे के बाबू को कम्प्यूटर के फारमेट में भरना होगा। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। देश भर में आरक्षण कराने वाले दलालों की बाढ़ सी आ गई है। यात्री टिकट बनवा नहीं पाते और दलाल पहले टिकट बनवाकर निकल जाते हैं। ऐसी स्थिति में यात्रियों को आरक्षण कनफर्म नहीं मिलता। दलालों द्वारा बेचे जाने वाले टिकटों से यात्री भी सफर के दौरान कई बार पकड़ में आ जाते हैं।
रेलवे बोर्ड ने कम्प्यूटर में आरक्षण फारमेट में टेलीफोन व मोबाइल नम्बर का बिन्दु भी फीड कर दिया है। अब जब भी कोई व्यक्ति टिकट बनवाने आएगा तो उसके द्वारा फार्म पर भरा गया टेलीफोन व मोबाइल नम्बर बाबू फारमेट में दर्ज करेगा।
टेलीफोन नम्बर भरने वाले यात्री को अपने शहर का एसटीडी कोड नम्बर भी भरना होगा। उसके बाद रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी व विजिलेंस अधिकारी डाटा पर नजर रखेंगे। टेलीफोन व मोबाइल नम्बर के बिना बने आरक्षण टिकटों की सूची तैयार की जाएगी। उसके बाद कभी-भी छापा मारकर दलालों व बाबू को पकड़ा जा सकेगा।




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