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थैंक्यू मायावती जी

उत्तर प्रदेश में अब कराए जाएंगे छात्र संघों के चुनाव



उत्तर प्रदेश सरकार ने यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के स्टूडे्टस् यूनियन चुनावों पर लगे बैन को हटा लिया है।
उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने यह जानकारी बुधवार को विधानसभा में दी। उन्होंने घोषणा की कि चुनाव लिंगदोह कमेटी के सुझाव के अनुसार ही कराए जाएंगे। बीएसपी सरकार ने सत्ता में आने के कुछ ही महीनों बाद 7 सितंबर 2007 को प्रदेश में स्टूडेंट्स बॉडी को भंग कर दिया था और इन चुनावों पर बैन लगा दिया था। इसके बाद पूरे उत्तर प्रदेश में हुए आंदोलनों में एक छात्र की मौत भी हो गई थी मगर इन आंदोलनों ने भी मायावती को चुनाव सुधारों के मंसूबों से डिगा नहीं पाया। यही नहीं कांग्रेस नेभी राहुल को बाकायदा छात्रनेता के रूप में उभारने की कोशिश की मगर मायावती इससे भी नहीं घबराईं। बाकायदा अपने तरीके से ही चुनाव कराना छीक समझा।
मालूम हो कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में विश्वविद्यालयों व कालेजों में फैली कानून व अव्यवस्था का आरोप लगाकर मायावती ने सत्ता में आते ही छात्रसंघों पर रोक लगा दी थी। इसके बाद मुख्यसचिव पाके मिश्रा का अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कमिटी बना दी जिसने अभी कल ही रिपोर्ट सौंपी है। इनकी सिफारिशों को सरकार ने मान लिया और छात्र संघों के चुनाव पर से रोक हटा ली। अब नए सत्र से चुनाव हो सकेंगे।
सिफारिश के बारे में मायावती ने कहा कि साफ छवि वाले छात्र ही चुनाव लड़ सकेंगे। दस दिन के भीतर पूरी चनाव प्रक्रिया संपन्न् करनी होगी और चुनाव में अधिकतम ५००० रुपए खर्च किए जा सकेंगे। चुनाव लड़ने वाले छात्रों की उम्रसीमा भी तय कर दी गई है। स्नातक, स्नात्तकोत्तर और शोध छात्र की उम्र सीमा क्रमशः २१. २५ और २८ रखी गई है।
मायावती ने छात्रसंघों के चुनावों में सुधार लाने के जो संकेत दिए हैं उससे स्पष्ट है वे भारत की राजनीति में शाफ छवि के लोगों को लाना चाहती हैं। यह प्रक्रिया अगर कड़ाई और ईमानदारी से लागू की गई तो यह संभव भी है कि राजनेताओं की आने वाली पीढ़ी ऐसे लोगों की होगी जो सचमुच में देश की जिम्मेदारी संभालने के काबिल होंगे। क्या केंद्र सरकार और दूसरी राज्य सरकारें नहीं चाहतीं कि देश को अच्छे राजनेता मिलें और राजनीति को अपराधियों से मुक्त किया जा सके।


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