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कालचिंतन जिस समयकाल के हम साक्षी हैं वह कल इतिहास हो जाएगा। इस समय काल को इतिहास बनने से पहले इसका सच जानने के मकसद से चिंतन का वीणा उठाया है। यह मेरी प्रवृत्ति भी है क्यों कि मैं पेशे से पत्रकार और शिक्षा-दीक्षा के लिहाज से इतिहासकार भी हूं। इतिहास व वर्तमान दोनों का संगम है यह कालचिंतन । वर्तमान को भी इतिहास के आइने से देखने का माध्यम होगा कालचिंतन। इसकी कुछ खरी-खोटी अनुचित लगे तो बेशक प्रहार कीजिएगा मगर ...और पढ़ें... 

मंदिरों के प्रसाद व असम की चाय भी दूसरे को दे देंगे डाकिए !
डाक विभाग तमाम नए प्रयोग कर रहा है टिकने के लिए मगर उसके लापरवाह व गुटबाज कर्मचारीहर कोशिश को धूल ... mandhata singh द्वारा 2 जुलाई, 2008 7:24:00 PM IST पर पोस्टेड
पत्रकारों व गैर पत्रकारो को 30 प्रतिशत अंतरिम राहत
अखबारों व समाचार एजंसियों के पत्रकारों व गैर पत्रकारों को ३० प्रतिशत अंतरिम राहत को न्यायमूर्ति के. ... mandhata singh द्वारा 29 जून, 2008 7:41:00 PM IST पर पोस्टेड
इसी देश के तो हैं अमरनाथ तीर्थयात्री
अमरनाथ तीर्थयात्रियों की व्यवस्था के लिए जमीन दिए जाने का सवाल पांच साल बाद जिन्न बनाकर कश्मीर में ... mandhata singh द्वारा 27 जून, 2008 8:44:00 PM IST पर पोस्टेड
Vehicles or 'Vahana' of Hindu gods and goddesses
Hindu deities have particular vehicles or vahana on which they travel. These vehicle, which are ... mandhata singh द्वारा 11 जून, 2008 7:32:00 PM IST पर पोस्टेड
ना तख्त बचा, ना ताज
कल के नेपाल के महाराज ग्यानेंद्र वीर विक्रम शाहदेव। अभी ही तो वह दौर भी गुजरा है जब नेपाल के ये ... mandhata singh द्वारा 29 मई, 2008 10:52:00 PM IST पर पोस्टेड